
*श्रीमद्भागवत की छठवें दिवस की कथा में हुआ कृष्ण रुक्मणि विवाह*
*रास एक भाव है जो आत्मा व परमात्मा के बीच होता है* पं मोहित शास्त्री
खण्डवा। रास कोई नृत्य करना या नाचना रास का मतलब नहीं है।रास एक भाव है जो आत्मा और परमात्मा के बीच होता है।गोपियों ने भगवान को गोपी गीत सुनाया ।गोपियों की प्रार्थना सुन भगवान ने गोपियों के साथ शरद पुर्णिमा के दिन महारास किया।जिसमें भगवान शंकर स्वयं गोपेश्वर महादेव का वेश धारण कर वृंदावन पधारे ।भगवान श्री कृष्ण ने 11 वर्ष की ब्रजलीला को विश्राम कर के मथुरा पधारे। मथुरा में कंस का वध किया।उज्जैन में 84 दिन में 84 विद्या का अध्ययन किया।भगवान की आज्ञा से सुन्दरपुरी का निर्माण हुआ ,जिसका नाम द्वारकापुरी पड़ा।भगवान वहां के राजा बने ।भगवान ने प्रथम पाणिग्रहण माता रुक्मणि के साथ किया। पुण्य सलिला माँ नर्मदा का हर कंकड़ शंकर है वैसे ही वेत्रवती का एक कंकड़ हर और दूसरा हरि है।इसलिए हमें पावन नदियों की महिमा को समझना चाहिए और सभी को जल संरक्षण व संवर्धन का प्रयास करना चाहिए।गोवर्धन नाथ की पूजा के साथ जल,वन व वृक्ष का संरक्षण हमारा कर्तव्य है। उपरोक्त उदगार श्रीमद्भागवत समिति द्वारा देवेन्द्र डाँड़गे, सरोज बाई व परिवार के सहयोग से स्व मिट्ठूलाल जी व स्व शांता बाई डाँड़गे की स्मृति में भवानी माता मंदिर प्रांगण में 6 अप्रैल से 3 बजे से 6 बजे तक प्रतिदिन आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिवस भगवताचार्य पं मोहित शास्त्री चामुंडिका धाम धनोरा ने व्यासपीठ से व्यक्त किये।समिति के मीडिया प्रभारी नारायण बाहेती व सुनील जैन ने बताया कि शास्त्री जी ने कहाकि जहा प्रेम,श्रध्दा विश्वास समर्पण है,वहाँ स्वर्ग है,जंहा तर्क है वहां
नर्क है।भगवान कृष्ण ने गिरीराज धारण करके सभी बृजवासियों की रक्षा की उसी तरह हर मनुष्य को परमार्थ कार्य करते हुए, अपने धर्म की रक्षा करते हुए, गाय ,वन ,पर्वत ,वृक्ष की रक्षा करनी चाहिए ।रास की कथा श्रवण कराते हुए कहा जिस प्रकार कृष्ण गोपियों को प्रेम से मिले वैसे ही मनुष्य को सदैव प्रेम पूर्वक रहना चाहिए ।बांसुरी कथा सुनाते हुए कहा की बांसुरी मधुर बोलती है, वैसे ही हमे मधुर बोलना चाहिए ।उसके कोई गांठ नहीं होती इसलिए हमें भी अपनो के प्रति द्वेष क्रोध की गांठ नहीं रखना चाहिए ।और बांसुरी को जितना बजाओ उतनी बजती है । लायन्स क्लब खण्डवा नेत्रदान व देहदान समिति के नारायण बाहेती ने नेत्रदान की जानकारी देकर मरणोपरांत देहदान की अपील की। कथा में श्री कृष्ण भगवान व रुक्मणी जी के विवाह का मनमोहक सजीव चित्रण किया गया। कथा के पूर्व देवेंद्र डाँडगे, सरोज बाई डाँडगे,बाबूलाल बिढारे,मोहनलाल डाँड़गे, नारायण बाहेती, सुरेंद्र बिडारे, सुनील जैन,ललित ढस्के, ज्ञानेश्वर डाँड़गे,रविन्द्र बिडारे,प्रवीण खरटे, बिरजू जामने,पन्नालाल खरटे, जगदीश खरटे आदि ने व्यासपीठ का पुजन व आरती की।कथा में लायन्स क्लब खण्डवा साथियों द्वारा नेत्रदान के पम्पलेट वितरित किये गए। समापन दिवस की कथा 1 बजे से 3 बजे तक होगी।








